*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*
*हमने "अहसास" खोया है, अपने "ज़मीर" (अंतरात्मा) खोए हैं, "उम्मत का तसव्वुर" (अवधारणा) खोया है, "इंसानियत" खोई है!*
*हमारा नुक़सान अहल-ए-ग़ज़ा व फ़िलिस्तीन से कई गुना ज़्यादा है।*
*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*
*हमने "अहसास" खोया है, अपने "ज़मीर" (अंतरात्मा) खोए हैं, "उम्मत का तसव्वुर" (अवधारणा) खोया है, "इंसानियत" खोई है!*
*हमारा नुक़सान अहल-ए-ग़ज़ा व फ़िलिस्तीन से कई गुना ज़्यादा है।*