*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*
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Ummah Post
15 October, 2024

*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*

*हमने "अहसास" खोया है, अपने "ज़मीर" (अंतरात्मा) खोए हैं, "उम्मत का तसव्वुर" (अवधारणा) खोया है, "इंसानियत" खोई है!*

*हमारा नुक़सान अहल-ए-ग़ज़ा व फ़िलिस्तीन से कई गुना ज़्यादा है।*

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सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?
लेख

सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?

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