*मलफ़ूज़ात (कथन) हकीम-उल-उम्मत मुजद्दिद-उल-मिल्लत हज़रत मौला...
Ummah Post
14 October, 2024

*मलफ़ूज़ात (कथन) हकीम-उल-उम्मत मुजद्दिद-उल-मिल्लत हज़रत मौलाना मुहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाही अलैहि*

*शैतान में किस बात की कमी है?*

इरशाद फ़रमाया कि: केवल किसी चीज़ का जान लेना कोई ऐसा कमाल (विशेषता) नहीं है, इस तरह तो शैतान भी बहुत बड़ा आलिम (विद्वान) है, बड़े-बड़ों को बहकाता है; वह तफ़्सीर में माहिर है, हदीस से वाक़िफ़ है, फ़िक़्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र) में कामिल (पूर्ण) है—ऐसा क्या है जिसे वह नहीं जानता? अगर वह ज़्यादा न जानता होता, तो उलेमा (विद्वानों) को कैसे बहका सकता था।

जब कोई व्यक्ति किसी फ़न (विधा/क्षेत्र) में माहिर होता है, तभी तो वह अपने से कम जानने वाले को धोखा दे सकता है। उसमें (यानी शैतान में) अगर कमी है, तो सिर्फ़ इसी बात की है कि वह अपने इल्म (ज्ञान) पर अमल नहीं करता।

*चूँकि हदीस शरीफ़ में भी आया है कि ऐसा इल्म जो अमल के लिए न हो, वह जहन्नम (नरक) का ज़रिया (साधन) है।*

(फ़ैज़ान-ए-मुजद्दिद, सफ़हा (पृष्ठ) 152)

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