"मेरे दुश्मन मेरा क्या बिगाड़ सकते हैं! मेरी जन्नत मेरे दिल में है और मेरा बाग़ मेरे सीने में है; मैं जहाँ भी जाऊँगा, ये मेरे साथ रहेंगे और मुझसे कभी जुदा नहीं होंगे। मेरा क़ैद होना मेरे लिए ख़लवत (एकांतवास/इबादत) है, मेरा क़त्ल होना मेरे लिए शहादत है और मेरा देश निकाला (जलावतनी) मेरे लिए सियाहत (पर्यटन/सैर) है।"
— इब्न तैमियाह