अहल-ए-इल्म (विद्वानों) से वफ़ा की एक नायाब मिसाल...

सऊदी...
Ummah Post
12 October, 2024

अहल-ए-इल्म (विद्वानों) से वफ़ा की एक नायाब मिसाल...

सऊदी मुफ़्ती-ए-आज़म शेख अब्दुल अज़ीज़ अल-शेख (हफ़िज़हुल्लाह) ने इमाम इब्न हज़म, हाफ़िज़ इब्न अब्द अल-बर्र, इमाम मुन्ज़िरी, इमाम न ववी और हाफ़िज़ इब्न रजब (रहिमहुमुल्लाह) की तरफ़ से हज किए हैं। शेख फ़रमाते हैं कि मुझे इन आइम्मा (इमामों) की किताबों से बहुत फ़ायदा हुआ, मैं उन्हें अपना मोहसिन (उपकारक) समझता हूँ।

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उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (रहिमहुल्लाह) की अंगूठी पर नक़्श था: "अल-वफ़ाउ अज़ीज़" — वफ़ा (वफ़ादारी) नायाब है।

(तारीख़-ए-दमिश्क़ लि-इब्न असाकिर: 45/177)

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"वफ़ादार दोस्तों को ढूँढना दुश्मन बनाने से कहीं ज़्यादा मुश्किल है। किसी को दुश्मन बनाने में एक लम्हा लगता है, मगर सच्चे दोस्त की तलाश में पूरी उम्र बीत जाती है। जिस किसी को बा-वफ़ा दोस्त मिल जाए, उसे उस दोस्ती को मज़बूती से थाम लेना चाहिए!"

(शेख सालेह अल-उसैमी हफ़िज़हुल्लाह)

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