आज पश्चिमी विज्ञान (علوم), जो वास्तव में विशुद्ध अज्ञानता (जाहिलियत) हैं, आधुनिक रूप में इस्लामी समाज में प्रवेश करके हमारे अकीदे (विश्वास), विचारों और सामाजिक व्यवस्था को नष्ट कर रहे हैं... इस वैचारिक आक्रमण (فکری یلغار) के कारण नई पीढ़ी अपने दीन (धर्म) के बारे में संदेह का शिकार हो रही है और वह खुलेआम धार्मिक मूल्यों और परंपराओं को पुराना और व्यावहारिक रूप से असंभव घोषित कर रही है। पश्चिम की बौद्धिक सर्वोच्चता लगातार हमारी शिक्षित पीढ़ियों को अपने जादू (فسوں کاری) में निगल रही है... आज के दौर में मानवाधिकार, विचार की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिला स्वतंत्रता, उदारवाद (लिबरलिज्म), धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) और आधुनिकतावाद (मॉडर्नइज्म) जैसे पश्चिमी विचारों को ही पवित्र ठहराया जा रहा है, जो वास्तव में ईश्वर और रसूल के इनकार, वह्य (प्रकाशना) के इनकार और मनुष्य की दिव्यता (الوہیت) पर आधारित हैं... इसलिए ज़रूरी है कि पश्चिमी विचारों और विज्ञानों का अध्ययन करके क़ुरान व हदीस, फ़िक़्ह (न्यायशास्त्र) व कलाम (धर्मशास्त्र) के प्रकाश में उनकी समीक्षा की जाए... अल्लाह हमारे ईमान और अमल की हिफ़ाज़त फ़रमाए...
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