रिक्शा शाहराह के बाएँ हिस्से पर दौड़ता जा रहा था कि बाईं तरफ...
Ummah Post
21 October, 2026

रिक्शा शाहराह के बाएँ हिस्से पर दौड़ता जा रहा था कि बाईं तरफ़ से शाहराह में शामिल होने वाली एक पतली सड़क से एक गाड़ी बग़ैर रुके अचानक रिक्शा के सामने आ गई। रिक्शा ड्राइवर ने पूरी क़ुव्वत से ब्रेक दबाते हुए रिक्शा को दाहिनी तरफ़ घुमाया और हम बाल-बाल बच गए, गो मेरा कलेजा मुँह को आ गया था।

बजाय इसके कि गाड़ी का ड्राइवर अपनी ग़लती की माफ़ी माँगता, खुले शीशे से सिर बाहर निकालकर हमें कोसने लगा। मेरा ख़याल था कि रिक्शा ड्राइवर उसे तुर्की-ब-तुर्की जवाब देगा क्योंकि ग़लती उस कार वाले की थी, लेकिन रिक्शा ड्राइवर ने मुस्कुराकर बड़े दोस्ताना तरीक़े से हाथ हिलाया। मैंने रिक्शा ड्राइवर से कहा: "अंकल, उसने तो आपके रिक्शे को तबाह करने और हम दोनों को अस्पताल भेजने में कोई कसर न छोड़ी थी और आपने मुस्कुराकर उसे अलविदा कहा?"

रिक्शा ड्राइवर कहने लगा: कुछ लोग महरूमियों या नाकामियों और गोबर-मग़्ज़ होने की वजह से भरे हुए कूड़े के ट्रक की तरह होते हैं। जब उनके दिमाग़ में बहुत ज़्यादा कूड़ा इकट्ठा हो जाता है तो जहाँ से गुज़रते हैं गंदगी बिखेरते जाते हैं। और बाज़ औक़ात अच्छे-भले लोगों पर भी यह गंदगी डाल देते हैं। ऐसा होने की सूरत में नाराज़ होने का कोई फ़ायदा नहीं, अपने ऊपर बुरा असर लिए बग़ैर गुज़र जाना चाहिए, वरना आप भी उससे ली हुई गंदगी अपने साथियों पर उंडेलने लगेंगे। और मैं हैरानी से इस रिक्शा ड्राइवर की तरफ़ देखने लगा जिसने इतनी आसानी से मुझे इतनी बड़ी बात समझा दी।

सबक़: कुछ लोगों की आदत होती है अपनी ग़लती की माफ़ी माँगने के बजाय सामने वाले पर भड़कने लगते हैं, जवाबन हम भी उसे मुँह तोड़ जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ते, जिससे बजाय नुक़सान के कुछ हाथ नहीं लगता। समझदारी से काम लेते हुए अगर हम अपने हुस्न-ए-अख़लाक़ का मुज़ाहिरा करते हुए गुज़र जाएँ तो वक़्त की बचत के साथ अपने ज़ेहन व ज़बान की हिफ़ाज़त के साथ सामने वाले को सोचने पर मजबूर ज़रूर कर सकते हैं।

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घी चोर नौकर
लेख

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