आह…! यह फ़ानी (नश्वर) दुनिया…
भूल जाने वाले लोग,
ख़त्म हो...
Ummah Post
18 August, 2026

आह…! यह फ़ानी (नश्वर) दुनिया…

भूल जाने वाले लोग,

ख़त्म हो जाने वाली लज़्ज़तें,

मिट जाने वाले नाम…

आरज़ी (अस्थायी) मसर्रतें…

वक़्ती (क्षणिक) ख़ुशियाँ…

रुक जाने वाली सांसें।

हर नफ़्स (आत्मा/जीव) को मौत का मज़ा चखना है…! (कुल्लु नफ़्सिन ज़ाइक़तुल मौत…!)

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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
लेख

हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...