ज्ञान का आभार (शुकराना) व्यक्त करने में से यह भी है कि जब आप...
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ज्ञान का आभार (शुकराना) व्यक्त करने में से यह भी है कि जब आप किसी सभा में हों, और कोई ऐसा मुद्दा चर्चा में आ जाए जो आप न जानते हों और आप उस सभा से वह सीख लें; तो फिर जब आप किसी दूसरी सभा में हों और वही मुद्दा दोबारा चर्चा में आ जाए तो आप कहें: "सच बात तो यह है कि मुझे इस मुद्दे के बारे में नहीं पता था, लेकिन मैंने फ़लाँ सभा में फ़लाँ व्यक्ति से यह सुना, तब मुझे मालूम हुआ।" जब आप ऐसा करेंगे तो मानो आपने ज्ञान का आभार अदा कर दिया।

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हुज़ूर ﷺ का अपने साथियों के साथ सुलूक
लेख

हुज़ूर ﷺ का अपने साथियों के साथ सुलूक

हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फ़रमाते हैं कि मैंने अब्बा जान सैयदुना अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से पूछा कि हुज़ूर ﷺ अपने हम-नशीनों (साथियों) के साथ कैसे रहते थे? आपने फ़रमाया: "आप ﷺ ख़ंदा-रू (हँसमुख), ख़ुश-अख़लाक़ (अच्छे आचरण वाले) और नर्म-ख़ू (नर्म स्वभाव के) थे। बद-अख़लाक़ी, सख़्त-मिज़ाजी...