कभी-कभी मुस्कुरा भी लेना चाहिए....! 🥹

एक व्यक्ति बाजार म...
Ummah Post
6 June, 2026

कभी-कभी मुस्कुरा भी लेना चाहिए....! 🥹

एक व्यक्ति बाजार में आवाज लगा रहा था, "गधा ले लो! एक अशरफी में गधा ले लो!"

गधा अत्यंत कमजोर और लाचार (दुबला-पतला) था।

संयोग से उसी समय राजा अपने मंत्री के साथ वहां से गुजरा।

राजा उस गधे के पास रुका और पूछा,

"कितने में बेच रहे हो?"

तगड़ा ग्राहक देखते ही मालिक ने तुरंत गधे के दाम बढ़ा दिए।

वह तुरंत बोला,

"आलीजाह (महारानी/महाराज)! दो थैली सोने की अशरफियां कीमत है।"

राजा हैरान रह गया।

"इतना महंगा गधा? इसमें आखिर ऐसी क्या खास बात है?"

गधे वाले ने अदब से कहा,

"हुजूर! जो इस पर बैठता है उसे मक्का और मदीना दिखाई देने लगते हैं।"

राजा को यकीन न आया।

"अगर तुम्हारी बात सच हुई तो हम पांच थैली सोने की अशरफियां देंगे।

लेकिन अगर झूठ निकला तो तुम्हारा सिर उड़ा दिया जाएगा।"

फिर उसने मंत्री को हुक्म दिया,

"इस पर बैठो और बताओ, क्या नजर आता है?"

मंत्री गधे पर बैठने ही वाला था कि गधे वाले ने उसे रोक दिया और हकारत (नफरत) से बोला,

"जनाब! मक्का मदीना किसी गुनहगार को नजर नहीं आता।"

मंत्री तड़प कर रह गया, गुस्से से बोला,

"हम गुनहगार नहीं हैं! एक तरफ हो!"

वह बैठ गया, मगर जाहिर है कुछ नजर न आया।

अब वह सोचने लगा कि अगर सच बता दिया तो रुसवाई (बेइज्जती) होगी।

अचानक जोर से चिल्लाया,

"सुभान अल्लाह! माशा अल्लाह! अल्हम्दुलिल्लाह! क्या रूहानी मंजर है मक्का मदीना का!"

राजा बेचैन हो गया।

"हटो! हमें भी देखने दो!"

और खुद गधे पर बैठ गया।

लेकिन उसे भी कुछ दिखाई न दिया।

मगर राजा होने का पर्दा रखना जरूरी था।

वह आंखों में आंसू भरकर बोला,

"वाह मेरे मौला! क्या करामत है!

मेरा मंत्री तो सिर्फ मक्का मदीना तक पहुंचा,

मुझे तो साथ-साथ जन्नत भी दिखाई दे रही है!"

राजा के उतरते ही जनता टूट पड़ी,

कोई गधे को छूने लगा,

कोई चूमने लगा,

कोई उसके बाल काटकर तबर्रुक (प्रसाद/आशीर्वाद) के तौर पर रखने लगा।

कभी-कभी कुछ लोग ऐसे ही हमें सब्ज बाग (झूठे सपने) दिखाते हैं, कभी आपके साथ ऐसा हुआ है? 🤭🫣

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