इमाम बुखारी की परवरिश उनकी वालिदा (मां) ने की,
इमाम शाफ़ई क...
Ummah Post
2 May, 2026

इमाम बुखारी की परवरिश उनकी वालिदा (मां) ने की,

इमाम शाफ़ई की परवरिश उनकी वालिदा ने की,

इमाम अहमद बिन हम्बल की परवरिश उनकी वालिदा ने की,

मुहम्मद फ़ातिह की परवरिश उनकी वालिदा ने की ताकि वह कुस्तुनतुनिया (कांस्टेंटिनोपल) के फ़ातिह (विजेता) बनें,

हाफ़िज़ इब्न हजर की परवरिश उनकी बहन ने की,

और इब्न तैमिया की वालिदा का नाम "तैमिया" था, जो एक मुबल्लिग़ा (उपदेशक) थीं, चुनांचे वह अपनी वालिदा की निस्बत से मशहूर हुए!

औरतें मर्दों को बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं,

जब औरत की इस्लाह (सुधार) हो जाए तो घर और मुआशरा (समाज) दोनों संवर जाते हैं!

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*अल-बुखारी रब्बतहु उम्मुहु (बुखारी की परवरिश उनकी मां ने की),*

*अश-शाफ़ई रब्बतहु उम्मुहु (शाफ़ई की परवरिश उनकी मां ने की),*

*अहमद बिन हम्बल रब्बतहु उम्मुहु (अहमद बिन हम्बल की परवरिश उनकी मां ने की),*

*मुहम्मद अल-फ़ातिह रब्बतहु उम्मुहु लियकूना फ़ातिहल-कुस्तुनतुनिय्याह (मुहम्मद फ़ातिह की परवरिश उनकी मां ने की ताकि वह कुस्तुनतुनिया के विजेता बनें),*

*अल-हाफ़िज़ इब्न हजर रब्बतहु उख्तुहु (हाफ़िज़ इब्न हजर की परवरिश उनकी बहन ने की),*

*वब्नु तैमिया कानत उम्मुहु तुसम्मा तैमिया, वकानत वाइज़तन, फ़नुसिबा इलैहा, वउरिफ़ा बिहा! (और इब्न तैमिया की मां का नाम तैमिया था, और वह एक उपदेशक थीं, तो वह उनकी तरफ मंसूब हुए और उन्हीं से जाने गए!)*

*अन्-निसाउ मसानिउर-रिजाल (महिलाएं मर्दों की फैक्ट्रियां हैं),*

*इज़ा सलुहतिल-मरअतु सलुहल-बैतु वल-मुज्तमअ (जब औरत नेक/सुधर जाती है तो घर और समाज नेक/सुधर जाता है)।*

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