हज़रत मौलाना मुहम्मद इलियास साहब रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते थे कि जिस बात से दिल में असर न हो, वह कानों की अय्याशी (मौज-मस्ती) है। आज-कल बड़ों के मलफ़ूज़ात (कथन) पढ़ने का शौक़ नहीं, क़िस्से-कहानियों को सुनने और पढ़ने का शौक़ है, यह कानों की अय्याशी है।
*(इक़्तिबास (अंश) अज़ बयान हज़रत जी मौलाना मुहम्मद साद साहब, इज्तेमा रायविंड 2014)*