20 दिसंबर को शमाइल अब्दुल्लाह नदवी और मशहूर बदनाम नास्तिक (म...
Ummah Post
28 November, 2025

20 दिसंबर को शमाइल अब्दुल्लाह नदवी और मशहूर बदनाम नास्तिक (मुल्हिद) जावेद अख्तर के बीच 'वजूद-ए-हक़' (ईश्वर के अस्तित्व) पर मुनाज़रा (बहस) या मज़ाकरा (चर्चा) होना है। मैं समझता हूँ कि इस पर मुसलमानों को यह नीयत और दुआ विशेष रूप से करनी चाहिए कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस चर्चा को नास्तिकों के सुधार और हिदायत (मार्गदर्शन) का ज़रिया बनाए। भाई शमाइल नदवी ने यक़ीनन यह नीयत की होगी। अल्लाह तआला हक़ (सत्य) को उनकी ज़बान से ऐसे जारी फ़रमाए कि बातिल (असत्य) का खोखलापन पूरी तरह साफ़ हो जाए और इस बातिल के मानने वालों के सामने हक़ अपने पूरे प्रभाव के साथ स्पष्ट हो जाए। शमाइल नदवी को ग़ैर-ज़रूरी मशवरे (सलाह) देना और "उखाड़ देंगे, पटक देंगे" जैसी टिप्पणियाँ करना बेहद नुक़सानदेह होगा। कृपया भारत के मुसलमान इस स्वस्थ अकादमिक व वैचारिक चर्चा को जंग और लड़ाई-झगड़े का रूप न दें, इसका बहुत ज़्यादा नुक़सान होगा, बहुत ज़्यादा।

अल्लाह तआला शमाइल नदवी की ज़बान पर हक़ को उसके पूरे प्रभाव के साथ हिदायत बनाकर जारी फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

✍️: समीउल्लाह ख़ान

Share this article
बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही
लेख

बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा, "बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे शौहर (पति) ने तुम्हें क्या तोहफ़ा दिया???" सहेली ने कहा, "कुछ भी नहीं!!!!" उसने सवाल करते हुए पूछा, "क्या यह अच्छी बात है??? क्या उनकी नज़र में तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं???" लफ़्ज़ों (शब्दों) का यह ज़हरीला बम गिराकर वह सहे...