रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,
ख़ुदा के बाद बस...
Ummah Post
21 October, 2025

रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,

ख़ुदा के बाद बस वो हैं, फिर उसके बाद क्या कहिए!

शरीअत का है ये इसरार, ख़ातमुल-अम्बिया कहिए,

मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए!

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हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)
लेख

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)

एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूसरे अकाबरीन (वरिष्ठ नेता) भी वहाँ जमा थे। फ़िरंगी ने बुलाया और कहा, "हुसैन अहमद! यह जो तुमने फ़तवा दिया है कि अंग्रेज़ की...