कभी-कभी दिल चाहता है कि बस वैसे ही सो जाऊँ... जैसे सूरह कहफ़...
Ummah Post
17 October, 2025

कभी-कभी दिल चाहता है कि बस वैसे ही सो जाऊँ... जैसे सूरह कहफ़ के असहाब-ए-कहफ़ (गुफ़ा वाले) सोए थे... 🌷

सदियों की नींद हो... ऐसी ख़ामोशी हो जहाँ कोई दर्द, कोई सदा (आवाज़) न पहुँचे... ♥️

और जब आँख खुले... तो यह दौर, यह तकलीफ़ें सब कुछ बीत चुका हो। न कोई पहचान बाक़ी हो... न मैं किसी को जानूँ, न कोई मुझे...

बस एक नई दुनिया हो... जहाँ सिर्फ़ सुकून का राज हो... 🍂✨

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अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर
लेख

अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर

हज़रत मौलाना यूसुफ़ बनूरी (रहमतुल्लाही अलैहि) ने एक मर्तबा एक मजलिस (सभा) में इर्शाद फ़रमाया कि: एक साल हम हज के लिए गए, वहाँ उलेमा (विद्वानों) के ग्रुप में एक रिटायर्ड फ़ौजी अफ़सर भी था। तहज्जुद के वक़्त वह फ़ौजी अफ़सर हम सब से पहले उठकर बैतुल्लाह शरीफ़ चला जाता और उस वक़्त तवाफ़ करता था। मौलाना फ...