गुस्ताख़-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

نشانی میرے آقا...
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9 October, 2024

गुस्ताख़-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

نشانی میرے آقا کی مٹاؤ گے یہاں کب تک (निशानी मेरे आक़ा की मिटाओगे यहाँ कब तक)

حقیقت کو چھپائیں گے یہ ظالم حکمراں کب تک (हक़ीक़त को छुपाएंगे ये ज़ालिम हुक्मरां कब तक)

ضرورت کے مطابق ہم نے چمن کی آبیاری کی (ज़रूरत के मुताबिक़ हमने चमन की आबयारी की)

ہمارے ساتھ ہولی لوگ کھیلیں گے یہاں کب تک (हमारे साथ होली लोग खेलेंगे यहाँ कब तक)

یہاں آثار جو بھی ہیں میرے پرکھوں کی منت ہے (यहाँ आसार जो भी हैं मेरे पुरखों की मिन्नत है)

کتابوں سے ہٹائیں گے ہماری داستاں کب تک (किताबों से हटाएंगे हमारी दास्ताँ कब तक)

نشیمن کو جلا کر وہی چپ چاپ بیٹھا ہے (नशेमन को जला कर वही चुप चाप बैठा है)

رہے گا میرے باغوں میں ایسا باغباں کب تک (रहेगा मेरे बाग़ों में ऐसा बाग़बां कब तक)

یہاں ذرہ ذرہ میں میرے اسلاف رہتے ہیں (यहाँ ज़र्रा ज़र्रा में मेरे असलाफ़ रहते हैं)

یہاں صبر و تحمل سے رہیں گے بے زباں کب تک (यहाँ सब्र व तहम्मुुल से रहेंगे बे-ज़बां कब तक)

غریبی دیکھ کر اپنے پرائے ہو ہی جاتے ہیں (ग़रीबी देख कर अपने पराए हो ही जाते हैं)

مظلوم کی سنتے رہے آہ و فغاں کب تک (मज़लूम की सुनते रहे आह व फ़ग़ां कब तक)

یہاں حق بات کہنے کی جسارت کھو گئی سب میں (यहाँ हक़ बात कहने की जसारत खो गई सब में)

گمنام آخر رہے گا آسماں مہرباں کب تک (गुमनाम आख़िर रहेगा आसमां मेहरबां कब तक)

- हाशिम चोकसी गुमनाम कावी वाला (भरूच, गुजरात, इंडिया)

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