"यह ज़रूरी नहीं कि हम एक दूसरे को खुश करने की कोशिश करें, बस...
Ummah Post
8 October, 2025

"यह ज़रूरी नहीं कि हम एक दूसरे को खुश करने की कोशिश करें, बस यही काफ़ी है कि एक दूसरे को तकलीफ़ न पहुँचाएँ। यह भी ज़रूरी नहीं कि हम एक दूसरे से मोहब्बत करें, बस यही काफ़ी है कि एक दूसरे के दुश्मन न बनें..."

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साजिश हो तो ऐसी!
लेख

साजिश हो तो ऐसी!

एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेकर एक धार्मिक विद्वान (आलिम-ए-दीन) के पास आया और कहने लगा: "हज़रत साहब! यह मेरी पत्नी हैं, इन पर अचानक किसी साए (आसिब) का हमला हुआ है, शायद जिन्न चढ़ा है।" जब इमाम साहब ने दम-दुरूद (दुआ) किया तो जिन्न बातें करने लगा। हज़रत साहब: "अभी के अभी बाहर निकलो, वरना मैं... !"...