"वह एक सज्दा जिसे तू गिराँ (भारी/मुश्किल) समझता है,
हज़ार स...
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"वह एक सज्दा जिसे तू गिराँ (भारी/मुश्किल) समझता है,

हज़ार सज्दों से देता है आदमी को नजात (मुक्ति)।" — अल्लामा इक़बाल

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गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा
लेख

गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा

जंग-ए-इस्कंदरिया (सिकंदरिया के युद्ध) में रूमी एक किले में बंद थे और मुसलमानों ने उस किले की घेराबंदी (محاصرہ) कर रखी थी। एक रोज़ रूमी मैदान में निकले और सिपहसालार हज़रत अम्र बिन अल-आस (रज़ियल्लाहु अन्हु) चंद सवारों को लेकर उनके मुक़ाबले हुए, घमासान की लड़ाई हुई। मुसलमान रूमियों को दबाते हुए बराबर क...