लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो...
मुनाफ़...
Ummah Post
9 October, 2024

लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो...

मुनाफ़िक़ (पाखंडी) को नज़रअंदाज़ कर दो, बुरे को फाड़ दो...

और सबसे ख़ूबसूरत पर रुक जाओ...

इंसान भी किताबों की तरह होते हैं...

कुछ लोग सिर्फ़ सरवरक़ (कवर) से धोखा देते हैं,

जबकि कुछ का अंदरूनी मवाद (सामग्री) हैरान करने वाला होता है, हालांकि उनका कवर बिल्कुल आम सा लगता है।

पहली नज़र में प्रभावित न हों, वक़्त हर चीज़ का फ़ैसला कर देता है।

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अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस
लेख

अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ़रमाया... कि एक शख़्स था जिसने अपनी जान पर बड़ा ज़ुल्म किया था... बड़े-बड़े गुनाह किए थे... बड़ी ख़राब ज़िंदगी गुज़ारी थी....