"हमें दुनिया से क्या मतलब, मदरसा है वतन अपना,
मरेंगे हम कित...
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"हमें दुनिया से क्या मतलब, मदरसा है वतन अपना,

मरेंगे हम किताबों पर, वरक़ (पन्ने) होंगे कफ़न अपना।"

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दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)
लेख

दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)

लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...