"कभी जब गुफ़्तगू (बातचीत) फ़रमाते थे मोती पिरोते थे,
कि सब...
Ummah Post
30 September, 2025

"कभी जब गुफ़्तगू (बातचीत) फ़रमाते थे मोती पिरोते थे,

कि सब अल्फ़ाज़ (शब्द) वाज़ेह (स्पष्ट), ग़ैर-मुबहम (असंदिग्ध), साफ़ होते थे।

कलाम (भाषण) ऐसा मुकम्मल (पूर्ण), जामे (व्यापक) व पुर-मग़्ज़ (अर्थपूर्ण) हक़्क़ानी (सत्य से भरपूर),

न बिल्कुल मुख़्तसर (संक्षिप्त), मुग़लक़ (कठिन/जटिल), अधूरा ही न तूलानी (लंबा)।"

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सी स्क्वर्ट: दिमाग खाने वाला समुद्री जीव
लेख

सी स्क्वर्ट: दिमाग खाने वाला समुद्री जीव

06 जून, 2025 - "जाओ, मेरा दिमाग मत खाओ"। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने यह वाक्य न सुना हो। हमारी भाषा में "दिमाग खाना" केवल एक मुहावरे के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन समुद्र में एक ऐसी प्रजाति भी है जो वास्तव में अपना ही दिमाग खा जाती है। इस प्रजाति को "सी स्क्वर्ट" (Sea squirt) कहा जाता ह...