ज़फ़र अली ख़ान ने कहा:
"दियार-ए-यसरिब (मदीना की सरज़मीन) मे...
Ummah Post
29 September, 2025

ज़फ़र अली ख़ान ने कहा:

"दियार-ए-यसरिब (मदीना की सरज़मीन) में घूमता हूँ, नबी की दहलीज़ चूमता हूँ।

शराब-ए-इश्क़ पी कर झूमता रहूँ; रहे सलामत पिलाने वाला।"

शेख़-उल-हिन्द (रह.) ने जन्नत से मुख़ातिब (संबोधित) होकर फ़रमाया:

"तुझ में हूर व क़सूर (महल) रहते हैं, मैंने माना ज़रूर रहते हैं।

मेरे दिल का तवाफ़ कर जन्नत, मेरे दिल में हुज़ूर (ﷺ) रहते हैं।"

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मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...