आए दुनिया में बहुत पाक व मुकर्रम (पवित्र और सम्मानित) बन कर,...
Ummah Post
29 September, 2025

आए दुनिया में बहुत पाक व मुकर्रम (पवित्र और सम्मानित) बन कर,

आया न मगर कोई रहमत-ए-आलम (संसार के लिए दयालु) बन कर।

दमकता रहे तेरे रौज़े का मंज़र, सलामत रहे तेरे रौज़े की जाली,

हमें भी अता हो वह शौक़-ए-अबूज़र, हमें भी अता हो वह जज़्बा-ए-बिलाली।

थकी है फ़िक्र-ए-रसाँ (सोच और बुद्धि), मदह (प्रशंसा) बाक़ी है, क़लम है आबला-पा (थका हुआ/छालेदार), मदह बाक़ी है,

वरक़ (पन्ने) तमाम हुआ, मदह बाक़ी है, और उम्र तमाम लिखा, मदह बाक़ी है।

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लेख

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