"ज़फ़र आदमी उसको न जानिए गा, हो वह कैसा ही साहब-ए-फ़हम-व-ज़क...
Ummah Post
21 September, 2025

"ज़फ़र आदमी उसको न जानिए गा, हो वह कैसा ही साहब-ए-फ़हम-व-ज़का (बुद्धिमान और चतुर),

जिसे ऐश (सुख) में याद-ए-ख़ुदा न रही, जिसे तैश (क्रोध) में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा!

— बहादुर शाह ज़फ़र मरहूम"

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क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला
लेख

क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला

एक रियासत में एक बूढ़े शख़्स को रोटी चोरी करते हुए पकड़ा गया। इलाक़े के कुछ लोग उसे पकड़कर वक़्त के क़ाज़ी (जज) के पास ले गए। क़ाज़ी ने बूढ़े बाबा से काफ़ी सवाल किए, लेकिन बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया। आख़िरकार क़ाज़ी ने फ़ैसला इस तरह सुनाया: "बाबा जी रोटी चोरी करने के जुर्म में एक दिरहम तंदूर के...