और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...
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Ummah Post
30 August, 2025

और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...

मेरी आँखों ने फ़क़त (सर्फ़) आपका रास्ता देखा। 🌸

सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (अल्लाह की रहमत और सलामती हो उन पर और उनकी आल पर)। 🤍

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एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़
लेख

एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़

यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो बिना अपने होठों को बंद किए?" उन्होंने कोशिश की और कामयाबी के साथ शब्द 'हलाल' कह लिया बिना अपने होठों को बंद किए।...