"चाहने वाले भी बड़े नसीब से मिलते हैं,
तुम यह तस्लीम करोगे...
Ummah Post
28 August, 2025

"चाहने वाले भी बड़े नसीब से मिलते हैं,

तुम यह तस्लीम करोगे (मानोगे) मेरे बिछड़ जाने के बाद।"

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सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?
लेख

सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?

✍🏻मुलाज़िम बहुत ही आज्ञाकारी था। मालिक ने खुश होकर उसकी पांच हजार तनख्वाह बढ़ा दी। उसकी आज्ञाकारिता में कोई फ़र्क नहीं आया, लेकिन वह बहुत ज़्यादा शुक्रगुज़ार भी नहीं हुआ। मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया कि मैंने इसकी तनख्वाह बढ़ाई लेकिन इसने अच्छे से शुक्रिया भी अदा नहीं किया। उसने अगले महीने तन...