"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू ब...
Ummah Post
27 August, 2025

"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू बहाए बगैर ज़िंदगी नहीं गुज़ारी जा सकती!

- मुस्तनसर हुसैन तारड़"

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हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है
लेख

हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है

इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाही अलैहि) के वालिद साहब का इंतक़ाल हो गया। तीन दिन ताज़ियत (शोक) के लिए बैठे रहे, तीन दिन के बाद बाहर निकल कर चौक में आ गए। एक शख़्स आपका हासिद (ईर्ष्या करने वाला) था और सख़्त विरोधी था, सारा इलाक़ा जानता था कि वह आपका मुख़ालिफ़ (विरोधी) है। जब आप बाहर निकले तो चौक में बहुत...