"दूसरों को माफ़ कर दें, इसलिए नहीं कि वे माफ़ी के हक़दार (मु...
Ummah Post
25 August, 2025

"दूसरों को माफ़ कर दें, इसलिए नहीं कि वे माफ़ी के हक़दार (मुस्तहिक) हैं, बल्कि इसलिए कि आप मानसिक शांति (ज़ेहनी सुकून) के हक़दार हैं।"

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अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर
लेख

अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर

हज़रत मौलाना यूसुफ़ बनूरी (रहमतुल्लाही अलैहि) ने एक मर्तबा एक मजलिस (सभा) में इर्शाद फ़रमाया कि: एक साल हम हज के लिए गए, वहाँ उलेमा (विद्वानों) के ग्रुप में एक रिटायर्ड फ़ौजी अफ़सर भी था। तहज्जुद के वक़्त वह फ़ौजी अफ़सर हम सब से पहले उठकर बैतुल्लाह शरीफ़ चला जाता और उस वक़्त तवाफ़ करता था। मौलाना फ...