"मसरूफ़ (व्यस्त) तो सभी लोग हैं।
कुछ थक रहे हैं अपनी आख़िरत...
Ummah Post
25 August, 2025

"मसरूफ़ (व्यस्त) तो सभी लोग हैं।

कुछ थक रहे हैं अपनी आख़िरत (परलोक) बनाने को,

और कुछ थक रहे हैं इसे तबाह करने को।

जन्नत तो सभी चाहते हैं...

पर कुछ थक रहे हैं दुनिया को जन्नत बनाने को...!!

और कुछ थक रहे हैं हक़ीक़ी (वास्तविक) जन्नत पाने को...!!

दो विभिन्न अंदाज़-ए-ज़िंदगी (जीवनशैली) हैं...

दो विभिन्न अंजाम (परिणाम) हैं..."

- मनक़ूल (उद्धृत)

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अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस
लेख

अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ़रमाया... कि एक शख़्स था जिसने अपनी जान पर बड़ा ज़ुल्म किया था... बड़े-बड़े गुनाह किए थे... बड़ी ख़राब ज़िंदगी गुज़ारी थी....