अल्लाह के नाम से करूँ इब्तिदा (शुरुआत),
जिससे मिले दिल को हर रहनुमा (मार्गदर्शक)।
क़ुरआन है अल्लाह का पाक कलाम (पवित्र वाणी),
जो हमें दिखाता है सच्चा निज़ाम (व्यवस्था)।
तफ़्सीर (व्याख्या) हमें समझाती है बात,
क्या चाहता है रब्ब-ए-काएनात (सृष्टि का मालिक)।
हदीस में है नबी ﷺ की हर बात,
हमारी ज़िंदगी के लिए वो है नजात (मुक्ति/सफलता)।
फ़िक़्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र) हमें बताता है क्या सही क्या ग़लत,
कैसे गुज़ारें हम अपनी रोज़ व शब (दिन और रात)।
इल्म-ए-कलाम (धर्मशास्त्र) है अक़ीदे (आस्था) की रोशनी,
सच और झूठ की पहचान है यही।
तसव्वुफ़ (स सूफ़ीवाद) सिखाता है दिल की सफ़ाई,
अल्लाह से मोहब्बत, और दिल की भलाई।
मदरसे हैं इल्म (ज्ञान) का रोशन चिराग़,
यहाँ से मिले हर इल्म का सुराग़।
उस्ताद और आलिम (विद्वान) हैं नेमत-ए-ख़ुदा,
इनसे ही मिलता है दीन (धर्म) का पता।
इस्लामी इल्म है हमारी शान,
यही है कामयाबी का असल निशान।
अगर न हो इल्म, तो हम भटक जाएँ,
अंधेरों में अपनी राह खो जाएँ।
आओ इल्म-ए-दीन को फैलाएँ,
जहालत (अज्ञानता) को हम सब मिटाएँ।