"रात सोकर गुज़ार देना और सुबह उस पर नादिम (शर्मिंदा) होना, रात इबादत करके गुज़ारने और सुबह उस पर अकड़ते (अहंकार करते) फिरने से बेहतर है।"
— (मदारिजुस सालिकीन लिल-इब्निल क़य्यिम: 1/272)
"रात सोकर गुज़ार देना और सुबह उस पर नादिम (शर्मिंदा) होना, रात इबादत करके गुज़ारने और सुबह उस पर अकड़ते (अहंकार करते) फिरने से बेहतर है।"
— (मदारिजुस सालिकीन लिल-इब्निल क़य्यिम: 1/272)