आइए! जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दस्त-ओ-बाजू (मददगार) बनें — सिर्फ...
Ummah Post
29 July, 2025

आइए! जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दस्त-ओ-बाजू (मददगार) बनें — सिर्फ ₹10 में प्राइमरी मेंबर बनें

जमीयत उलेमा-ए-हिंद एक प्रतिष्ठित कौमी, दीनी और सामाजिक संगठन है जो बरसों से मुसलमानों की धार्मिक पहचान, शैक्षिक जागरूकता, सामाजिक कल्याण, संवैधानिक संरक्षण और मिल्लत (कौम) की एकता के लिए संघर्ष कर रहा है।

अल्हम्दुलिल्लाह! सदस्यता अभियान 2025 शुरू हो चुका है और इस वर्ष की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।

हर मुसलमान मर्द और औरत से गुजारिश है कि आगे आएं, सिर्फ 10 रुपये देकर प्राइमरी मेंबर बनें, और मिल्लत की इस मजबूत आवाज का हिस्सा बनें।

✅ ऑनलाइन सदस्यता की प्रक्रिया बेहद आसान है

📲 कुछ ही मिनटों में आप मोबाइल से ही फॉर्म भरकर जमीयत के मेंबर बन सकते हैं।

🔗 ऑनलाइन फॉर्म का लिंक:

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📅 अंतिम तिथि: 31 जुलाई

💰 फीस: सिर्फ ₹10 (प्राइमरी मेंबरशिप)

🌟 याद रखें! आपकी 10 रुपये की शिरकत, मिल्त के रोशन मुस्तकबिल (उज्ज्वल भविष्य) में एक कीमती सरमाया (पूंजी) है।

"एक फर्द (व्यक्ति) नहीं, एक मिल्लत (कौम) बनकर उभरिए"

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आज़माइशों के पीछे छिपी ईश्वरीय हिकमत: मौलाना रूमी का एक ख़ूबसूरत सबक़
लेख

आज़माइशों के पीछे छिपी ईश्वरीय हिकमत: मौलाना रूमी का एक ख़ूबसूरत सबक़

एक दिन मौलाना रूमी (रहमतुल्लाह अलैह) अपने घर तशरीफ़ ले गए और देखा कि उनका बेटा उदास बैठा है। उन्होंने दरयाफ़्त किया (पूछा) कि "बेटा, उदास क्यों हो?" तो बेटे ने जवाब दिया, "कुछ नहीं।" इस पर मौलाना रूमी (रहमतुल्लाह अलैह) बाहर गए और एक भेड़िये की खाल ओढ़कर आए और डराने के लिए गुर्राने लगे। इस पर उनका...