इमाम अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाह (१५० हिजरी) ने अपने शागिर्द (शिष्...
Ummah Post

इमाम अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाह (१५० हिजरी) ने अपने शागिर्द (शिष्य) अबू यूसुफ़ रहमतुल्लाह (१८२ हिजरी) को वसीयत (नसीहत) करते हुए कहा:

"लोगों से बहुत ज़्यादा मेल-जोल मत रखो सिवाय इसके कि वे तुम्हारे साथ मेल-जोल रखना चाहें। और जब भी उनसे मिलो तो इल्म (ज्ञान) की बातें छेड़ दो। ताकि जो उनमें क़ाबिल हो वह इल्म के साथ मश्गूल (व्यस्त) हो जाए, और जो निकम्मा हो वह आपसे कतराना (बचना) शुरू कर दे, और आपसे लगाव ख़त्म कर दे, बल्कि आपके क़रीब भी न भटके।"

(मनाक़िब अबी हनीफ़ा लिल-मुवफ़्फ़क़ अल-मक्की: २/११४)

Share this article
अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर
लेख

अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर

हज़रत मौलाना यूसुफ़ बनूरी (रहमतुल्लाही अलैहि) ने एक मर्तबा एक मजलिस (सभा) में इर्शाद फ़रमाया कि: एक साल हम हज के लिए गए, वहाँ उलेमा (विद्वानों) के ग्रुप में एक रिटायर्ड फ़ौजी अफ़सर भी था। तहज्जुद के वक़्त वह फ़ौजी अफ़सर हम सब से पहले उठकर बैतुल्लाह शरीफ़ चला जाता और उस वक़्त तवाफ़ करता था। मौलाना फ...