मेरी अर्ज़-ए-तमन्ना भी अजब अर्ज़-ए-तमन्ना है,
कि तुझ को मां...
Ummah Post
17 July, 2025

मेरी अर्ज़-ए-तमन्ना भी अजब अर्ज़-ए-तमन्ना है,

कि तुझ को मांगता हूं — और तुझ ही से मांगता हूं।

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अपनी ज़िंदगी का जायज़ा
लेख

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन। ८. जब तुझे वह हादसा मौत का पेश आएगा जिसको कोई नहीं टाल सकता, तो माल-ओ-दौलत और नौकर-ओ-ख़ादिम तेरे कुछ भी काम न आएँगे।...