मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,...
Ummah Post
7 July, 2025

मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,

किसे सरकार-ए-दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का अब घर याद आता है।

मुसलमानों ज़रा सोचो,

है क्या पाया है क्या खोया।

💔💔💔

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वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)
लेख

वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते को छोड़ देने में और अपनी तरफ़ से नए रास्ते बनाने में इंसान की बर्बादी है। अल्लाह तआला ने ग़िज़ा (भोजन) को पेट तक पहुँचान...