"ग़रीब-ओ-सादा-ओ-रंगीन है दास्तान-ए-हरम,
निहायत (अंत) इसकी ह...
Ummah Post
5 July, 2025

"ग़रीब-ओ-सादा-ओ-रंगीन है दास्तान-ए-हरम,

निहायत (अंत) इसकी हसीन, इब्तिदा (आरंभ) है इस्माईल।"

— अल्लामा इकबाल

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काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं

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