काबा के ग़िलाफ़ (कवर) को बदलने का दिल को छू लेने वाला नज़ारा...
Ummah Post
29 June, 2025

काबा के ग़िलाफ़ (कवर) को बदलने का दिल को छू लेने वाला नज़ारा ❤

है कितनी कशिश ख़ाना-ए-काबा तेरे अंदर,

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर।

😍😍

Share this article
कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

कलमा पढ़ी हुई मेम

हमारे एक दोस्त थे; ज़ेहन (सोच) इस्लामी, लेकिन चेहरा-मोहरा ग़ैर-इस्लामी। हम सिर्फ़ उनके ज़ेहन पर ही अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। मौसूफ़ (महोदय) कुछ समय के लिए इंग्लैंड तशरीफ़ ले गए, और जब उनकी वापसी हुई तो बगल में एक मेम (गोरी मेम) थीं! चूँकि मौसूफ़ का ताल्लुक एक पारंपरिक परिवार से था, इसलिए यह ख़...