वह चाहता तो सामने पड़ोसी के प्लॉट तक भी अपनी सीढ़ी खींच सकता...
Ummah Post
27 June, 2025

वह चाहता तो सामने पड़ोसी के प्लॉट तक भी अपनी सीढ़ी खींच सकता था, हालांकि... पूरा प्लॉट बिल्कुल खाली पड़ा था। फिर भी उसने दिल पर "पत्थर" रखकर महज़ गली के आधे से कुछ ज़्यादा हिस्से पर ही "इक्तिफ़ा" (संतोष) किया और राहगीरों के लिए आने-जाने की थोड़ी-बहुत "गुंजाइश" भी बाकी छोड़ दी—बमुश्किल एक बाइक निकल जाएगी, इन शा अल्लाह।

आख़िर इंसानियत भी तो कोई चीज़ होती है ना...!!

पोस्ट शेयर कर दें ताकि ऐसे "नेक लोगों" का हौसला बढ़े और दूसरों को भी इस कार-ए-खैर (नेक काम) की "तरग़ीब" (प्रेरणा) मिले।

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इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़
लेख

इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़

असली नाम अम्र बिन महबूब था, 160 हिजरी में पैदा हुए और 'जाहिज़' के लक़ब (उपाधि) से मशहूर हुए। अरबी में जाहिज़ उसे कहते हैं जिसकी आँखों के ढेले (पुतलियाँ) बाहर की ओर उभरे हुए हों। शुरुआत में वे इस लक़ब को नापसंद करते थे, लेकिन रफ़्ता-रफ़्ता (धीरे-धीरे) ख़ामोश हो गए। शायद ही किसी के रूप-रंग का इस तर...