*मदरसों के छात्रों के नाम 🤭*

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं...
Ummah Post
26 June, 2025

*मदरसों के छात्रों के नाम 🤭*

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है,

यह सालाना इम्तिहान (वार्षिक परीक्षा) है, तमाशा नहीं है...

ग़ौर कर क़ुदूरी, जामी, शरह विक़ाया (मदरसे की किताबें) पर,

इम्तिहान कर देगा तेरा बिल्कुल सफ़ाया...

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।

यह सालाना इम्तिहान है, तमाशा नहीं है...

यही धुन है तुझको कि नंबर आएं नुमायाँ (शानदार)...

फिर भी हाथ में है मोबाइल उठाया...

दुरूसुल बलाग़ाह, क़ुत्बी या कि हिदाया।

एक हफ़्ते में सालाना (इम्तिहान) कर देगा बिल्कुल सफ़ाया,

जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।

*यह सालाना इम्तिहान है, तमाशा नहीं है।*

Share this article
आख़िरी सफ़र की पुकार
लेख

आख़िरी सफ़र की पुकार

सालिहीन (नेक लोगों) में से एक शख़्स रोज़ाना शहर की दीवार पर खड़े होकर रात में यह आवाज़ लगाता था, "चलो, क़ाफ़िले के चलने का वक़्त आ गया है"। जब उनका इंतक़ाल (निधन) हो गया, तो शहर के हाकिम (शासक) को यह आवाज़ सुनाई नहीं दी। तहक़ीक़ (जांच) करने पर पता चला कि उनकी वफ़ात हो गई है, तो अमीर (शासक) ने ये अशआ...