लफ़्ज़ तासीर (असर) से बनते हैं, तलफ़्फ़ुज़ (उच्चारण) से नहीं...
Ummah Post
25 June, 2025

लफ़्ज़ तासीर (असर) से बनते हैं, तलफ़्फ़ुज़ (उच्चारण) से नहीं;

अहल-ए-दिल (दिल वाले) आज भी हैं अहल-ए-ज़बाँ (भाषा के जानकारों) से आगे।

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ये हालात बदलते क्यों नहीं?
लेख

ये हालात बदलते क्यों नहीं?

मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्लाह वाले लगातार अल्लाह के हुज़ूर दुआएं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं और हालात बद से बदतर...