हर जुस्तजू (खोज) अबस (व्यर्थ) है जो तेरी जुस्तजू न हो,
दिल...
Ummah Post
23 June, 2025

हर जुस्तजू (खोज) अबस (व्यर्थ) है जो तेरी जुस्तजू न हो,

दिल संग-ओ-खिश्त (पत्थर और ईंट) है जो तेरी आरज़ू न हो।

— (मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ान ग़ालिब)

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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी
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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज...