किसी दार्शनिक (फिलासफर) से पूछा गया कि वह अपनी पत्नी का चयन...
Ummah Post
15 June, 2025

किसी दार्शनिक (फिलासफर) से पूछा गया कि वह अपनी पत्नी का चयन कैसे करेगा?

दार्शनिक ने उत्तर दिया:

न बहुत खूबसूरत हो कि दूसरों की नज़र उस पर पड़े, न बदसूरत कि मेरी अपनी तबीयत उससे बेज़ार (परेशान) हो जाए।

न बहुत लंबी हो कि मुझे अपनी गर्दन ऊंची करनी पड़े, न बहुत छोटी कि मुझे सिर झुकाना पड़े।

न बहुत मोटी हो कि हवा के रास्ते में रुकावट बने, न बहुत दुबली कि वह सिर्फ एक साया (परछाई) महसूस हो।

न बहुत गोरी (सफ़ेद) हो कि मोम जैसी लगे, न बहुत काली कि साया दिखाई दे।

न जाहिल (अज्ञानी) हो कि बात समझाना मुश्किल हो, न बहुत ज्ञानी कि हर वक़्त बहस करे।

न बहुत मालदार हो कि कहे "यह मेरा माल है", न बहुत ग़रीब कि मेरे बच्चे मुश्किल में पड़ जाएं।

न ग़ुस्से वाली हो कि उसे मनाना मुश्किल हो, न हर वक़्त मांग (मुतालबा) करने वाली हो।

न चीखने वाली हो कि उसकी आवाज़ से कान के पर्दे फट जाएं, न इतनी ख़ामोश कि बिल्कुल कोई आवाज़ ही न हो।

कहा जाता है कि यह दार्शनिक आख़िरकार कुंवारा ही मर गया! 😭🤣😂🤣

Share this article
युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ
लेख

युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ

कितने पुरुष हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अल-माएदा" की तफ़सीर पढ़ाई गई और कितनी महिलाएँ हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अन-नूर" की तफ़सीर पढ़ाई गई? जानता हूँ, बहुत कम हैं। मगर दूसरी तरफ देखें...! कितने पुरुष हैं जिन्होंने माता-पिता से बालिग होने के बाद सुना कि "तुम्हारी कोई ऐसी-वैसी बात न स...