"मेरे बच्चे! अपना ख़्वाब अपने भाइयों को न सुनाना, कहीं वे तु...
Ummah Post
15 June, 2025

"मेरे बच्चे! अपना ख़्वाब अपने भाइयों को न सुनाना, कहीं वे तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई साज़िश न रचने लगें।"

(सूरह यूसुफ़)

हर किसी के सामने अपनी नेमतों (बरकतों) का ज़िक्र न किया कीजिए, आपकी बात सुनने वाला हर शख़्स आपको पसंद करने वाला नहीं होता। अपने आस-पास वालों के लिए खुली किताब बनकर न रहें, चाहे वे आपके कितने ही क़रीबी हों, यहाँ तक कि चाहे वे घर वाले ही क्यों न हों...

अपने कुछ राज़ (रहस्य) छुपाकर रखिए। क्योंकि न तो हर किसी के पास यूसुफ़ की क़मीज़ होगी और न ही आपके पास याक़ूब जैसा सब्र और ईमान होगा।

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इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर
लेख

इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर

इमाम मोहम्मद (रह.) के नाम से कौन नावाक़िफ़ (अपरिचित) है, इन्हीं की किताबों ने हनफ़ी फ़िक़्ह को मुदव्वन (मूर्तरूप/कोडीफाइड) किया, मसलों के दलायल (प्रमाण) जमा किए, इख़्तेलाफ़ी अक़्वाल (मतभेदों) का ज़िक्र किया और दुनिया के अक्सर (अधिकांश) ख़ित्तों (क्षेत्रों) में रायज (प्रचलित) फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी को तस्नी...