*गैर-मुस्तहिक़ (अपात्र) का जकात लेने का इबरतनाक (चेतावनीपूर्ण...
Ummah Post
13 June, 2025

*गैर-मुस्तहिक़ (अपात्र) का जकात लेने का इबरतनाक (चेतावनीपूर्ण) वाक़या*

*मुफ्ती-ए-आज़म मुफ्ती मोहम्मद रफ़ी उस्मानी (मद्ज़िल्लहु) फरमाते हैं:*

हिंदुस्तान में हमारे एक रिश्तेदार थे। उनकी औलाद, फिर उनकी औलाद की औलाद को हमने देखा; उनमें से कोई भी मर्द, औरत या बच्चा ऐसा नहीं है जो किसी न किसी खतरनाक मुसीबत में मुब्तला (ग्रस्त) न हो... एक मुसीबत खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है...

वालिद मोहतरम मुफ्ती मोहम्मद शफ़ी साहब (रहमतुल्लाह अलैह) एक मर्तबा मुझसे फरमाने लगे कि "इस खानदान में जो मुसीबतें इतनी कसरत (अधिकता) से नज़र आती हैं... मुझे उसकी सिर्फ एक ही वजह मालूम होती है कि वो फलां साहब जो उनके दादा थे, वह जकात के हकदार (मस्तहिक) तो नहीं थे, लेकिन जकात ले लिया करते थे।"

— [इसलाही मजलिसें, जिल्द 1, पृष्ठ 116]

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रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)
लेख

रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)

अल्लामा इब्न-ए-हजर हैतमी रहमतुल्लाही अलैहि की किताब है "अज़-ज़वाज़िर अन इक़्तिराफ़िल कबाइर"। इसमें उन्होंने एक वाक़िया लिखा है: एक शख़्स हज के इरादे से गया और जब हज करने लगा तो उसने मक्का में पूछा कि सबसे अमानतदार शख़्स कौन है? तो बतलाया गया कि फ़लाँ शख़्स है। तो वह उसके पास गया और अपने एक हज़ार दीन...