"पानी का पूरा समंदर भी किसी जहाज़ को नहीं डुबो सकता जब तक कि वह पानी जहाज़ के अंदर न आ जाए।
इसी तरह, दुनिया की सारी नकारात्मक सोच या नकारात्मक बातें भी आपको नीचे नहीं गिरा सकतीं जब तक कि आप खुद उन्हें अपने दिलो-दिमाग में जगह न दें।"
यह कथन एक खूबसूरत उपमा (मिसाल) के ज़रिए हमें यह सिखाता है कि बाहरी नकारात्मक परिस्थितियाँ, बातें या लोग सिर्फ तभी हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं जब हम उन्हें अपने अंदर आने की अनुमति देते हैं। जैसे एक जहाज़ पानी पर तैरता है और तब तक सुरक्षित रहता है जब तक पानी उसके अंदर न आए, वैसे ही इंसान भी तब तक मजबूत रहता है जब तक वह नकारात्मक विचारों को अपने दिलो-दिमाग में प्रवेश न करने दे।