हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा...
Ummah Post
11 June, 2025

हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि आप अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:

"ईमान की सत्तर से ज़्यादा शाखाएँ (इक्शाम) हैं। और हया भी ईमान का एक हिस्सा है।"

— सहीह अल-बुख़ारी

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लेन-देन की सफ़ाई और आख़िरत का ख़ौफ़
लेख

लेन-देन की सफ़ाई और आख़िरत का ख़ौफ़

हज़रत वाला (रह.) की तरफ़ से अपने सारे मुरीदीन (शिष्यों) और मुतअल्लिक़ीन (परिचितों) को यह हिदायत थी कि जब कभी रेलवे में सफ़र करो, और तुम्हारा सामान उस मिक़दार (मात्रा) से ज़ायद (अधिक) हो जितना रेलवे ने तुम्हें मुफ़्त ले जाने की इजाज़त दी है, तो इस सूरत में अपने सामान का वज़न कराओ और ज़ायद सामान का कि...