"जब तक अपनी निजात (मुक्ति) का यक़ीन न हो, किसी गुनहगार का मज...
Ummah Post
11 June, 2025

"जब तक अपनी निजात (मुक्ति) का यक़ीन न हो, किसी गुनहगार का मज़ाक न उड़ाओ।"

— मौलाना रूमी (रहमहुल्लाह)

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दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज
लेख

दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज

एक लोमड़ (सियार) की दुम (पूंछ) पर पत्थर आ गिरा, और दुम कट गई। एक दूसरे लोमड़ ने जब उसे देखा तो पूछा, "यह तुमने अपनी दुम क्यों काटी?" दुम कटा लोमड़ बोला, "इससे बड़ी खुशी और फरहत (आनंद) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे हवाओं में उड़ रहा हूँ। वाह!! क्या मनोरंजन है!" बस घेर-घार कर (बहला-फुसलाकर) उ...