सुस्ती कितना बड़ा बवाल (आफ़त) है कि सब आमाल (काम) चाहे दीनी...
Ummah Post
10 June, 2025

सुस्ती कितना बड़ा बवाल (आफ़त) है कि सब आमाल (काम) चाहे दीनी (धार्मिक) हों या दुनियावी, इस सुस्ती की वजह से प्रभावित होते हैं।

कुछ दुआएं ऐसी हैं जिन्हें रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कभी नहीं छोड़ते थे।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़रमाया करते थे:

"ऐ अल्लाह! मैं फ़िक्र (चिंता), ग़म, अक्ज़ (लाचारी), सुस्ती, बुख़्ल (कंजूसी), बुज़दिली और लोगों के ग़लवे (दबाव) से तेरी पनाह में आता हूँ।"

Share this article
इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)
लेख

इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज्ञान) के तलबा (विद्यार्थी) हैं। इल्मे शरई (धार्मिक ज्ञान) को अल्लाह तआला ने 'कौले थक़ील' (एक भारी बात) क़रार दिया है। य...