एक बार इमाम अहमद बिन हंबल (रहमहुल्लाह) बगदाद के बाज़ार में ग...
Ummah Post
7 June, 2025

एक बार इमाम अहमद बिन हंबल (रहमहुल्लाह) बगदाद के बाज़ार में गए। उन्होंने लकड़ियों का एक गट्ठा खरीदा और उसे अपने सर पर रखकर घर की ओर चल दिए। जब लोगों ने यह देखा तो (अफरा-तफरी के कारण) बाज़ार बंद हो गए। व्यापारी लोग कतार दर कतार रास्ता छोड़कर खड़े हो गए। व्यापारियों ने सलाम अर्ज़ किया और कहा, "हम इसे उठा लेते हैं।"

इमाम के हाथ कांप उठे, चेहरा लाल हो गया और आँखों से आँसू टपकने लगे और उन्होंने फ़रमाया: "हम तो मसीकीन (असहाय/ग़रीब) हैं, अगर ख़ुदा ने हमारे ऐबों पर पर्दा न डाल रखा हो तो हम ज़लील (अपमानित) हो जाएं।"

Share this article
क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला
लेख

क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला

एक रियासत में एक बूढ़े शख़्स को रोटी चोरी करते हुए पकड़ा गया। इलाक़े के कुछ लोग उसे पकड़कर वक़्त के क़ाज़ी (जज) के पास ले गए। क़ाज़ी ने बूढ़े बाबा से काफ़ी सवाल किए, लेकिन बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया। आख़िरकार क़ाज़ी ने फ़ैसला इस तरह सुनाया: "बाबा जी रोटी चोरी करने के जुर्म में एक दिरहम तंदूर के...