"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा...
Ummah Post
6 June, 2025

"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा लेता है तो कभी 'बख़्त'। अगर इत्तेफाक से दोनों मिल जाएं, तो इंसान की तक़दीर बदल देते हैं।" ✍🏻

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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी
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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज...