"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में...
Ummah Post
6 June, 2025

"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में बंद हो जाता है, तो फिर सच्चाई की रोशनी भी उसके दिल तक नहीं पहुँचती। इल्म (ज्ञान) तब ही असर करता है जब दिल झुकने को तैयार हो, और सीखने वाला खुद को खाली महसूस करे। लेकिन जब कोई सिर्फ अपनी बरतरी (श्रेष्ठता) साबित करने पर तुल जाए, तो वह सच को नहीं, सिर्फ अपनी अना (अहंकार) को जिताता है और इस तरह इल्म, अक़्ल और फ़हम (समझ) सब हार जाते हैं।"

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घी चोर नौकर
लेख

घी चोर नौकर

एक व्यक्ति एक किराने की दुकान पर नौकरी करता था। वह किसी न किसी बहाने दुकान से कुछ न कुछ चोरी करता रहता था। दुकान का मालिक बहुत ही खुशमिज़ाज (अच्छे अख़्लाक़ वाला) और ईमानदार इंसान था। वक़्त गुज़रता गया और दस-बारह साल बीत गए। अल्लाह ने मालिक को खूब बरकत दी और उसकी दुकान शहर की सबसे बड़ी दुकान बन गई...